'बार-बार'
बार-बार
बड़ी विचित्र बात है
बार-बार की,
हर बार की,
एक ही बात की।
पटाखे न छोड़े
धुआँ न करें
कनफट आवाज से
पराए के साथ
बालक, बूढ़े, मरीजों का,
विचार करें त्रस जीवों का,
हवा का,
ध्वनि का, पानी का,
घर की रानी का।
वादे होते हैं, नारे लगते हैं,
अब की बार
पटाखे नहीं, मिठाई बाँटेंगे,
दीप जलाएंगे
प्रेम का, ज्ञान का,
सम्मान का,
श्याम का, राम का।
रैली में चक्का जाम होता है,
अच्छा सा फोटो होता है।
फिर ...
दिन ढल जाता है,
हवा में उड़ जाता है,
नारा खो जाता है,
आदमी खो जाता है,
समाँ बँध जाता है,
पटाखे छोड़े जाते हैं,
मिठाइयाँ बनती हैं
सिर्फ़ चैट जीपीटी पर
न बेसन, न शक्कर, न पानी
न लगती है घर की रानी।
रात भर धुआँ धुआँ,
समाचार में हवा हवा ।
फिर वही बात ...
अगले वर्ष दीपावली
पटाखे न छोड़ेंगे,
बार-बार,
बड़ी विचित्र बात है।
प्रा. धन्यकुमार जिनपाल बिराजदार, सोलापुर, महाराष्ट्र
9423330737


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







