इश्क का इतना काम है,
खुदा के लिए तो हर पल एक अंजाम है,
इंसान इस जहां में पाता है कि,
ये कितना असीमित और अथाह है,
पर खुदा के लिए जहां सिर्फ़ एक नाम है,
ये क्या तसल्ली दिए हुए हैं हर एक ज़माना,
कि उस खुदा के पास,
या उस पार नहीं जाया जा सकता,
कोई शब्द उसको दिखा नहीं सकता,
पर तुम यहाँ भी मात खाए हो,
ये सब शब्द उस खुदा के ही दिए हुए हैं,
तुम नहीं जा सकते उस पार,
तुम नहीं जा सकते उसके पास,
पर शब्द जा सकते हैं उस पार,
उसके पास,
अगर नहीं तो,
फिर ये शब्द क्या है,
प्रेम, इंसान , भाव, विचार, ईश्वर,माँ, परिवार, पैसा, समाज, जहां, आसमा या ज़मीं,
ये शब्द किसके पास गए,
किस पार गए,
इनका भी क्या औचित्य,
शब्द जाते हैं सब जगह है,
पूर्ण है, जैसे ब्रह्म,
जैसे ॐ,
अब ये क्या है,
तुम्हारे लिए ये ब्रह्मांड की आवाज है,
गूंज है अहनाद की,
पर ये भी शब्द है,
शब्द शून्य है,
पूर्ण है,
विराट सत्ता,
इसी से उस परब्रह्म का वर्णन है,
बस तुम इसकी भाषा,भाव, विचार, शब्द खोजों,,
ये ज्ञान के लिए तुम तैयार हो,
किसी की खोज को अंतिम मत मानो,
तुम अपनी खोज हो,
जो तुम खोज सकते हो,
शब्द जा सकते हैं उस पार उसके पास,
तुम नहीं।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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