त'आक़ुब (नज़्म)
(त'आक़ुब: पीछा करना)
उन हसीन ख़्वाबों का
उन उलझे जवाबों का
उन यादों के सहरा का
और उनके सराबों का
अब पीछा कौन करता है
(सराब: मृग तृष्णा)
पुरानी सारी बातों का
उन महकी सी रातों का
दिलों के दरमियाँ दर रोज़ की
उन वारदातों का
अब पीछा कौन करता है
दबी कुचली सी हसरत का
किसी पुरानी उल्फ़त का
जो न अब मयस्सर है
हां उस एक क़ुर्बत का
अब पीछा कौन करता है
(क़ुर्बत: नज़दीकी)
उन ख़्वाबों ख़यालों का
मोहब्बत के सवालों का
जो तन्हाई में बीते हैं उन
गुज़िश्ता सालों का
अब पीछा कौन करता है
(गुज़िश्ता:पिछला, बीता हुआ)
वो सब गुज़रे ज़मानों का
वो अपने सब ठिकानों का
वो जो वीराने हो चले हैं
पुराने सब मकानों का
अब पीछा कौन करता है
सभी मशगूल हैं अब
अपनी-अपनी ज़िंदगानी में
किसे फुर्सत है कि
खो जाए किस्से और कहानी में
मोहब्बत, दोस्ती, रिश्ता, वफ़ा
सब किस्से पुराने हैं
यहां तो बस न मिलने के अब
सौ-सौ बहाने हैं
तो ऐसे में भला अब क्या
किसी से दोस्ती होगी
चलो छोड़ो अब इन बातों का
पीछा कौन करता है।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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