अश्कों के समन्दर में डूबते उतरते रहें|
नादान अहसास मेरे संभलते बिखरते रहे,
कौन देखेगा खामोश अश्क़ जो दिखे नहीं,
दर्द मेरा आँखे आपस में कहते सुनते रहे,
ठंडी काया बर्फ़ सी पड़ी रही देहरी पर,
सांसें बेरहम जाने क्यों चलते रूकते रहें,
अश्क़ कहते रहे कहानी बीते दिनों की
यादें दोस्तों सी मेरे संग हंसते रोते रहे,
अश्क़ मेहमां बनकर आये थे,घर मेरे,
भूले नहीं मुझे हमेशा मिलते जुलते रहें|
दिन की हकीक़त रास न आयी ए दिल,
शब के ख्वाब मेरे साथ सोते- जागते रहे|
तन्हा नहीं है सफ़र मेरा अश्क़ क्यों सताये,
फरिश्ते वफाओं के साथ आते - जाते रहे|
रश्मि मृदुलिका


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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