अंनजाना सफर है मेरा
सफर अकेले पन का
खामोशी की काली रात का
दर्द और दिवानगी का
दिल के अंदर छूपे तुफान
तडपते पिघलते ओठ और
बिछडते आंसुओं का
खुद ही खुद से लडती
वक्त कि बेवफाई का
दर्द से टुटते बिखरते
मेरे उस मन का
जो घाव बनकर रह गये
उस वक्त का
हर रोज अंधेरों से डरती
लडती उस सफर का
कभी छुपती कभी छुपाती
हर सवाल जवाब का
आईना बनकर गुजरे
हर उस वक्त का
गवाह बनकर जो समय गुजरा
ये समय अंजान सफर का


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







