तेरे लिए बुना था, दिल के तारों का ताना-बाना हमने..
ज़माने को बताया है, कुछ और ही अफ़साना हमने..।
फुरकत से तेरी जो उड़ गया था, रंग चेहरे का मेरे..
हर दफ़ा बनाया नए मर्ज़ का, कोई बहाना हमने..।
माना कि अंधेरे रौशन है, महताब की रौशनी से..
फ़िर भी सोचा नहीं, कभी शब-ए-चिराग़ बुझाना हमने..।
जो चमन ने आँचल में छुपा ली खुशबुएं गुलों की..
तो सीख लिया, इस ज़मीं की मिट्टी को महकाना हमने..।
लाख वफाओं के बाद भी चाहत पे मेरी जो एतबार न आया..
फिर छोड़ दिया महफ़िल में, मुद्दा-ए-दिल उठाना हमने..।
कि उनकी मुहब्बत में "क्षितिज" टूटे हैं उसूल-ओ-कानून कई..
बेवज़ह दिल की अदालत में कभी, भरा नहीं जुर्माना हमने..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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