जब तलक रगों में, गर्म रवानी है
अपना मकाम अपनी ही बनानी है
रास्ते पर समंदर है, दरिया तूफानी है
कदम जो थम गये, बेकार जवानी है
लहरें मुसीबतों की, आनी और जानी है
रौंदकर कंकड़ों को, राह भी बनानी है
रूठ जाए मौसम, तल्ख हो किस्मत
हर बेमुरव्वती को, चुटकी में उड़ानी है
पांव जमीं पर रहे, नजरें आसमान पर
मुमकिन, नामुमकिन को करके दिखानी है।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







