हमें आज भी विश्वास नहीं होता कि,
शिक्षा और ज्ञान ये भी हाल करती है कि,
बच्चें आत्महत्या पर उतर आए,
इसमें दो ही कारण है,
पैसे और पूर्ण शिक्षा की उन तक पहुँच,
फिर उनका जन्म,
जिसने निश्चित कर दिया कि,
शिक्षा उन तक पहुँचेगी या नहीं,
मानव समाज आधुनिकता में भी,
मूलभूत सुविधाएं देने में असफल रहा,
संसाधनों का सब तक, समान हक ना मिल पाना,
मानव समाज की आत्महत्या है,
यही किसानों के साथ हुआ,
यही आमजन के साथ हुआ,
यही उस पिता के साथ हुआ,
यही उस नवजीवन के भविष्य के साथ हुआ,
यही घर की उन गृहिणियों के साथ हुआ,
यही उन बुजुर्ग वर्ग के साथ हुआ,
यही चाकरी एक दिन सबको लपेटकर,
घुमाती जाती है,
बहुत मुश्किल है,
अब के समय का जीवन,
अथाह सम्पन्न लोगों ने,
अपने अहं को संतुष्ट करने के लिए,
कितने लोगों को झुकाया है,
बहुत है,
बस संभाल रखे खुद को,
ज्यादा सुधार के चक्कर में भईया,
कहीं खुद के सुधर के दिन आन पड़े,
आपको भी पता है ये सुधार,
भी हमें जीवन ना जीने दे,
इसलिए ये एक भ्रम है,
हो सके अपना,
अपने माँ बाप,
बच्चों का,
संतुलित ध्यान रखें,
ताकि सब अपने कर्म खुद करें,
दबाव नहीं पड़े,
नहीं तो,
आत्महत्या जैसे,
तरीके लोग अपनाते हैं,
बस अपनी सलामती रखें,
बाकी आत्महत्याएँ रोकने का प्रयास करें।
- ललित दाधीच
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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