करिया करिया बादर, तैं काबर छाथस रे
पिया परदेश गए हे, अड़बड़ तरसाथस रे
छाती ले धक-धक के, जोर से अवाज आथे
कान झनझना जाथे, जब, बिजली लउकाथस रे
नाचे लगथे मोर मन, भीतरे भीतर झूमके
रिमझिम सावन बुंदिया, अंगना बरसाथस रे
सुरता मोला आवत रहिथे, दिन रात पिया के
का ,एको घरी, मोर सुरता, पिया ल करवाथस रे
अपने अपन बाजत रहिथे, मोर पांव के घुंघरू
करिया करिया बादर, तैं काबर छाथस रे।।
काबर - क्यों, किस लिए,किस कारण
सुरता - याद, स्मरण, स्मृति, ख्याल।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







