"मुक्तक"
मेरे गिर्द-ओ-पेश फिरती हैं परछाइयाॅं मेरी!
तन्हा मुझे नहीं छोड़तीं तन्हाइयाॅं मेरी!!
किसी हम-ज़ुबाॅं की अब मुझे कोई जुस्तुजू नहीं!
अब मुझ से हम-कलाम हैं ख़मोशियाॅं मेरी!!
- आलम-ए-ग़ज़ल परवेज़ अहमद
© Parvez Ahmad

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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"मुक्तक"
मेरे गिर्द-ओ-पेश फिरती हैं परछाइयाॅं मेरी!
तन्हा मुझे नहीं छोड़तीं तन्हाइयाॅं मेरी!!
किसी हम-ज़ुबाॅं की अब मुझे कोई जुस्तुजू नहीं!
अब मुझ से हम-कलाम हैं ख़मोशियाॅं मेरी!!
- आलम-ए-ग़ज़ल परवेज़ अहमद
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