आजा जी ले जी भर के
रूठ न तू मुझसे
ये वक्त भी अपना है नहीं
न आएगी ऐसी कोई ख्वाहिशें
फिर मिले या ना मिले
क्या पता हो ना, फिर मोहब्बतें
आजा जी ले जी भर के ..
सुनहरी धूप किनारा
सुबह में रोशन
ये धरती गगन,
सुंदर सा नज़ारा
कितना प्यारा
दूर नहीं हूँ मैं तुझसे
आजा जी ले जी भर के ..
"कच्ची पक्की जो भी है
यार यारी अपनी अच्छी है
सब झूठ मूठ बातें है जग में,
पर अपनी तो सच्ची है "


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







