इंसानियत का फर्ज
दिनांक: 18 जून, 2026
कल की वह शाम आम दिनों जैसी ही थी। मैं और मेरी पत्नी एक शादी समारोह का आनंद लेकर अपनी बाइक से घर वापस लौट रहे थे। ठंडी हवा चल रही थी और हम दोनों आपस में बातें करते हुए आगे बढ़ रहे थे। लेकिन कुछ ही दूरी पर अचानक रास्ते में लोगों की भारी भीड़ दिखाई दी। गाड़ियों के हॉर्न और लोगों की कानाफूसी से माहौल में अजीब सी बेचैनी थी।
जिज्ञासा और चिंता के कारण हमने अपनी बाइक किनारे लगाई और भीड़ की तरफ बढ़े। वहाँ का दृश्य देखकर दिल दहल गया। सड़क पर एक करीब 30 वर्ष का युवक दर्द से तड़प रहा था। उसका शायद एक भयानक एक्सीडेंट हुआ था। वह बुरी तरह घायल था और हाथ जोड़कर वहाँ खड़े लोगों से रोते हुए कह रहा था, "मुझे प्लीज हॉस्पिटल ले चलो... कोई मुझे बचा लो।"
भीड़ में हर कोई तमाशा देख रहा था, लेकिन कोई भी आगे बढ़कर उसकी मदद करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। मुझसे उसका यह दर्द देखा नहीं गया। मैं तुरंत उसके पास घुटनों के बल बैठा और उसे ढांढस बंधाते हुए उसका नाम पूछा। जब उसने अपना नाम और पता बताया, तो हमें एहसास हुआ कि वह तो हमारी ही कॉलोनी के पास वाली कॉलोनी का रहने वाला है।
समय गंवाए बिना, मेरी पत्नी ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और उसके बताए पते के आधार पर उसके घर वालों को इस हादसे की सूचना पहुँचाई। इसी बीच, मैंने सड़क से गुजर रहे एक नेकदिल गाड़ी वाले को हाथ देकर रोका। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वह गाड़ी चालक भी तुरंत तैयार हो गया। हमने मिलकर घायल युवक को गाड़ी में बिठाया और सीधे पास के अस्पताल की तरफ रवाना हुए।
अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी वार्ड में लिया। जब तक उसकी मरहम-पट्टी और शुरुआती इलाज चल रहा था, हम वहीं बाहर कॉरिडोर में बैठकर दुआ कर रहे थे। कुछ ही देर में उसके घर वाले भी बदहवास हालत में अस्पताल पहुँच गए। उन्हें वहाँ देखकर हमारी जान में जान आई।
हमने डॉक्टरों से बात की और उसके परिजनों को ढांढस बंधाते हुए पूरी घटना की जानकारी दी। जब डॉक्टरों ने आश्वासन दिया कि अब वह खतरे से बाहर है, तब जाकर उसके परिवार के चेहरों पर थोड़ी राहत दिखी। उन्होंने नम आँखों से हमारा हाथ थामकर धन्यवाद किया।
घड़ी की सुइयां रात के 10 बजा रही थीं जब मैं और मेरी पत्नी वापस अपने घर पहुँचे। शरीर थक चुका था, लेकिन मन में एक असीम सुकून था कि आज हम किसी की जान बचाने और इंसानियत का फर्ज निभाने में काम आ सके। यह सत्य घटना है।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞✒️💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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