वो इक आदमी था, आदमी के जैसा..
नगद गम और उधार की खुशी के जैसा..।
हर पल को, जी कर गुज़ारा उसने..
आंखों में चेहरा था, ज़िंदगी के जैसा..।
वो गुज़रा तो, कदमों में आवाज़ न थी..
मुड़ के देखा भी, मगर बेबसी के जैसा..।
खुशियों का भी ख़ौफ़ था, चेहरों पर उनके..
वहां हर शख्स था, उजड़ी हुई बस्ती के जैसा..।
उसकी अरदास पर, किसी ने गौर न किया..
उसका इसरार था, गरीब की अर्ज़ी के जैसा..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







