बहाना कितना भी बना लूँ।
चेहरे को मासूम बना लूँ ।।
मुझको तन्हा छोड़ने वाले ।
आ कभी तुझे गले लगा लूँ ।।
तुझ पर मुझको नाज़ बहुत ।
मायावी नजर से बचा लूँ ।।
शिकायत तो रहेगी जरूर।
चाँद सा नूर आँखों में बसा लूँ ।।
खिलखिलाहट से भरी 'उपदेश'।
जिन्दगी खुद की बना लूँ ।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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