धरा पर आए मुरली वाले
खुल गए जेल के ताले।
हो रही थी रिमझिम बरसात
अनौखी द्वापर युग की बात
अष्टमी भादों की थी रात
जेल में जन्मे बंशी वाले।
खुल गए जेल के ताले।
कंस का था जो कारागार
सो गये उसके पहरेदार
विष्णु का ले अष्टम अवतार
आ गये मनमोहन मतवाले।
खुल गए जेल के ताले।
तेज थी जमुना की जलधार
और जाना था नदिया पार
न मानी वासुदेव ने हार
रखे डलिया में बंशी वाले।
खुल गए जेल के ताले।
टोकरी से लटकाया पांव
नदी ने छू कर किया प्रणाम
छोड़ कर आये अपना धाम
क्षीरसागर में रहने वाले।
खुल गए जेल के ताले।
रंग गोरा था ना काला
पहन कर बैजंतीमाला
नंद घर आये नंदलाला
बांसुरी मधुर बजाने वाले।
खुल गए जेल के ताले।
सांवरे के घुंघराले बाल
चलें वे ठुमक ठुमक कर चाल
यशोदा के नटखट नंदलाल
चुराकर माखन खाने वाले।
खुल गए जेल के ताले।
राधिका बरसाने वारी
जिसकी अंखियां थीं कजरारी
उस पै दिल हारे गिरिधारी
सुदर्शन चक्र चलाने वाले।
खुल गए जेल के ताले।
गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर मध्यप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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