सर पे बिठाओ तो सब यहाँ फ़रिश्ते हैं
मोल करके देखो, पत्थर भी बिकते हैं l
हम भी परिंदे हैं, हमें अपना घर मालूम है
वहीं सवेरा हो जाएगा जिधर को उड़ते हैं l
मेरे सफ़र का वो मुकाम आ रहा है यारो
जहाँ शोले भी शबनम की तरह लगते हैं l
- रवींद्र कौर

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
सर पे बिठाओ तो सब यहाँ फ़रिश्ते हैं
मोल करके देखो, पत्थर भी बिकते हैं l
हम भी परिंदे हैं, हमें अपना घर मालूम है
वहीं सवेरा हो जाएगा जिधर को उड़ते हैं l
मेरे सफ़र का वो मुकाम आ रहा है यारो
जहाँ शोले भी शबनम की तरह लगते हैं l
- रवींद्र कौर
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम