"ए ज़िंदगी तूने बहुत कुछ सिखा दिया, परिस्थितियों से लड़ना और कंधों पे बोझ उठाना सिखा दिया।
बचपन मेरा तूने चंद लम्हों में याद दिला दिया, सड़कों पे चलकर बोझ ढोना सिखा दिया।
सम्मान की राहों पे अपनेपन को जीना सिखा दिया, ए ज़िंदगी तूने ज़िंदगी जीना सिखा दिया।
ना चाहकर भी आज तूने रोना सिखा दिया और, चादर के अंदर आंसू छिपाना सिखा दिया।
कर ले जुर्म जितना करना है मेरे हिस्से में, खुश रखना उनको जिसने जीवन जीना सिखाया है।
और समझा देना उनको कि जीवन में
क्या किया मैंने,
फर्क नहीं पड़ता कि कोई हंसता या
रोता है,
मनुष्य तब तक सीखता है जब तक
दुनिया में रहता है।"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







