रिश्ते भी पत्तियों की तरह ही होते हैं—शुरुआत में हरे-भरे, जीवन से भरपूर, लेकिन समय की आंधी में धीरे-धीरे पीले पड़ने लगते हैं।
फिर कब मुरझाकर टूट जाते हैं, इसका एहसास तक नहीं होता। कई बार हमें लगता है कि हम किसी रिश्ते को संजोकर रखेंगे, उसकी देखभाल करेंगे।
लेकिन समय की धूल जब उस पर जमने लगती है, तो वह बेजान और बेरंग होता चला जाता है। यही काल चक्कर है।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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