प्रकृति की सुंदरता
मन को अति लुभाती है
खुशबू है इन हवाओं में
जैसे फूल अपनी
खुशबू बिखेर रहे हैं
प्रकृति हरे लहंगे में
बेहद खूबसूरत
दिख रही है
मन को मोह रही है
मुस्कुराती प्रकृति
हृदय को प्रफुल्लित कर रही है
हर तरफ हरे-भरे पेड़ पौधे
मन को हर्षित कर रहे हैं
ये वादियां ये फिजाएं
ये घटाएं सब हंस रहे हैं
प्रकृति में नई ताजगी है
सुबह की सुंदर हवा
और सूरज की किरणें
नया जीवन देती हैं
प्रकृति की हरियाली
मन को शांति देती है
फूलों की खुशबू और
पंछियों का गीत
दिल को खुश कर देता है
नीला आकाश
और हरी ये धरती
मन में एक नया
विश्वास है भरती
प्रकृति की यह
अनुपम माया
जिसने भी देखा
उसी को भाया
सुंदर बहते झरनों का संगीत
गाता है सुंदर प्रकृति का गीत
इसकी सुंदरता में
खो जाता है मन
महक उठता है
इंसान, पशु-पंछी
पेड़-पौधे बाग बगीचे
सबका जीवन
प्रकृति का मनमोहक
दृश्य देख
आत्मा तृप्त हो जाती है
मन में खुशी के गुलाब
खिल उठते हैं।।
प्रकृति की नई रंगत
आंखों को दे रही है
सुकून और जन्नत
चारों तरफ छाई है ऐसी रौनक
जैसे धरती ने पहना हो
सुंदरता का गहना
प्रकृति का हर एक रंग
आंखों को भा रहा है
प्रकृति मन को लुभा रही है।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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