चमक आई है जहान में चांद _ सूरज और सितारों से कहता है _ वसी
वहां ज़ुल्मत में है_ बेजान मखलूकें ये ख़ोज पाई है हमने दिमाग से
दिमाग़ मे रौशनी बेदार हो मेरा इसके लिए ज़िंदगी की खुशियां छोड़ी है
हमारी गुरबती जिंदगी से जहान में खुशहाली आजाए ईनाम खुदा समझेंगे
हकीकत से वाकिफ कुछ ही लोग होते हैं ये दौर का वाकिया रहा है
जो रौशन थे और रौशन है ये रौशनी किसी ने पहचाना नहीं हयात में
बचपना, जवानी, उम्र दराज हर ज़माने का तजरबा हुआ जो दिल में है
अच्छी किरदार सदा एक जैसा रहा जिसका जो बेमिसाल है उसके और मेरे आंखों में
आदमी जो मशहूर होगया है जहान में ज़रूरी नहीं अच्छी चरित्र वो आचरण होगा
वसी अहमद क़ादरी ! वसी अहमद अंसारी
मुफक्किर ए कायनात ! मुफक्किर ए मखलूकात
वसी अहमद क़ादरी
मुफक्किर ए कायनात
मुफक्किर ए मखलूकात
दरवेश ! लेखक ! पोशीदा शायर


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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