(बाल कविता)
सपनों का पूरा संसार
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सौ बीघे का एक मकान ।
नौ सौ नब्बे रोशनदान ।।
सोने की थी हर दीवार,
लगे हुए थे पहरेदार ।
कमरे पूरे दो सौ चार,
अलमारी थीं एक हज़ार ।
शौचालय थे दो सौ बीस,
रहने वाले बहुत रईस ।
हर कमरे का अलग नहान,
करते जहाँ सभी स्नान ।
झील नदी नहरें तालाब,
तितली भौंरे फूल गुलाब ।
सपनों का पूरा संसार,
घर में चलती मोटर कार ।
जंगल का भी सुंदर सीन,
बिछी सभी जगह कालीन ।
राजा, मंत्री एक हजार,
लगा बहुत सुंदर दरबार ।
पूरा घर था मेरे पास,
थोड़ा ऊपर था आकाश ।
चांद सितारे करते बात,
देते थे मुझको सौगात ।
तभी दहाड़ा बब्बर शेर,
काँपी कोयल और बटेर ।
मैं चिल्लाया लगा के जोर,
हुआ अचानक घर में शोर ।
मम्मी ने फिर ऐंठा कान,
नालायक चल उठ शैतान ।
उठ बैठा मैं हो लाचार,
खत्म हुआ पूरा संसार ।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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