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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

🙏💐मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र जी को भावभीनी श्रद्धांजलि💐🙏

May 29, 2026 | आलेख | लिखन्तु - ऑफिसियल  |  👁 1,024

डॉ. बशीर बद्र भारत के सबसे लोकप्रिय और अजीम उर्दू शायरों में से एक थे, जिन्होंने कठिन उर्दू डिक्शनरी के शब्दों को छोड़कर शायरी को आम बोलचाल की बेहद सरल और 'मखमली' भाषा दी। उनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद बशीर था। अपनी दिलकश गज़लों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 28 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में भोपाल, मध्य प्रदेश में निधन हो गया।


प्रारंभिक जीवन:-

उनका जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद), उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से पूरी की। यहीं से उन्होंने बी.ए., एम.ए. और पीएचडी (Doctorate) की मानद उपाधियाँ प्राप्त कीं। उन्होंने मात्र सात वर्ष की अल्पायु से ही कविताएँ और शेर लिखना शुरू कर दिया था।


शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में व्याख्याता (Lecturer) के रूप में कार्य किया।

‎उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक मेरठ कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दीं और वे बिहार उर्दू अकादमी के अध्यक्ष पद पर भी कार्यरत रहे।


प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ:-

‎उन्होंने देवनागरी (हिंदी) और उर्दू दोनों लिपियों में कई गज़ल संग्रह लिखे।

उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:-

✍️उजाले अपनी यादों के (इनका सबसे प्रसिद्ध संग्रह,जिस पर विविध भारती का एक लोकप्रिय शो भी बना)
✍️छवि

‎✍️इकाई

‎✍️आहट

‎✍️आस

‎✍️आज़ादी के बाद उर्दू ग़ज़ल का तनक़ीदी मुताला (आलोचनात्मक पुस्तक)

पुरस्कार और सम्मान:-

साहित्य और उर्दू गज़ल में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें देश-विदेश में कई पुरस्कारों से नवाजा गया।

💫पद्मश्री:-
‎भारत सरकार द्वारा वर्ष 1999 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया।

‎💫साहित्य अकादमी पुरस्कार:-
‎ वर्ष 1999 में ही उन्हें उनके गज़ल संग्रह 'आस' के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला।


उनके कुछ शेर:-

🖋️"कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,
‎यूँ ही कोई बेवफ़ा नहीं होता।"

‎🖋️"मुझे इश्तिहार सी लगती हैं ये मोहब्बतों की कहानियाँ
‎जो कहा नहीं वो सुना करो जो सुना नहीं वो कहा करो।"

‎🖋️"परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता,
‎किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता।"

‎🖋️"आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा,
‎कश्ती के मुसाफ़िर ने समंदर नहीं देखा।"


‎🖋️"कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो।"

‎🖋️"वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे
‎चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे।"

‎🖋️"यूँ ही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो
‎वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो।"

‎🖋️"सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,
इतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा।"

‎🖋️"यारों की मोहब्बत का यक़ीं कर लिया मैंने
‎फूलों में छुपाया हुआ ख़ंजर नहीं देखा।"


Article by
Admin - Reena Kumari Prajapat
Admin Reena Kumari Prajapat




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (1)

+

सुभाष कुमार यादव said

भाव भीनी श्रद्धांजलि। बशीर बद्र साहब मेरे प्रिय शायरों में से एक हैं। जिनकी संजीदा शायरी एवं सहज भाषा सीधे दिल में उतर जाती है। जो एक बार इनको पढ़ ले इनकी ग़ज़लें, इनके शेर हमेशा के लिए याद हो जाते हैं। आज भले ही आप भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं रहे पर आपके विचार, आपकी ग़ज़लों में आप सदैव हमारे रहेंगे।🙏🙏

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