(बाल कविता)
मन करता है
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मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।
और लगा कर चक्कर सारे ब्रह्माण्डों के आऊँ ।।
रॉकेट लेकर नील गगन में आँख-मिचौली खेलूँ
बादल की मम्मी से मिलकर इंद्रधनुष भी ले लूँ
चंदा क्यों घटता-बढ़ता है जरा पूँछ कर आऊँ ।
मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।।
सूरज दादा इतनी गर्मी किससे लेकर आते
किससे आखिर गुस्सा होते, किससे गाल फुलाते
क्यों रूठे हैं दादा अपने जाकर उन्हें मनाऊँ ।
मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।।
कितने मीटर शनि का छल्ला, इंचीटेप से नापूँ
ब्लैक होल के भीतर क्या-क्या उसके मुँह में झाँकू
बैठी जो आकाश पे गंगा धरती पर ले आऊँ ।
मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।।
मंगल ग्रह पर प्लाटिंग करके, भूमि खटाखट बेचूँ
निर्धन और धनी लोगों को पंख लगा कर भेजूँ
हल बैलों से खेती-बारी हर दिन वहाँ कराऊँ ।
मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।।
सबसे बड़े बृहस्पति ग्रह पर , शीघ्र पहुँच कर घूमूँ
हाइड्रोजन हिलियम गैसों के गोले को ले झूमूँ
गुब्बारे-सा उङू रात दिन गोते खूब लगाऊँ ।
मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।।
फल वाले कुछ पेड़ लगा दूँ ग्रह उपग्रह के ऊपर
लाइट के खम्भे गढ़वा दूँ नक्षत्रों के भीतर
बटन दबाकर हाईलोजन से क्षण भर में चमकाऊं ।
मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।।
पानी की बोरिंग करवा दूँ हर तारे के भीतर
खाने के होटल खुलवा दूँ चंद्र लोक के ऊपर
पूरी दुनिया को ले जाकर बस्ती नई बसाऊँ।
मन करता है ऊँचे उड़कर आसमान में जाऊँ ।।
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~राम नरेश उज्ज्वल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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