(बाल कविता)
मैं हूँ रोबो
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मैं हूँ रोबो मानव जैसा
करता सारा काम ।
मानव थक जाता है लेकिन
चलता मैं अविराम ।।
चाय बना दूँ, पानी दे दूँ
और बना दूँ साग।
जोड़ घटाना पल में कर दूँ
काफी तेज दिमाग।।
पूरी दुनिया को मैं जानूँ
जानूँ मैं विज्ञान।
कैसे होता, काम कौन सा
इसका सारा ज्ञान।।
मानव की बीमारी का मैं
कर सकता उपचार ।
ऑपरेशन कर दे सकता हूँ
जीवन का आधार ।।
मानव ने ही मुझे बनाया
मैं मानव की जान।
सब कुछ मैं कर सकता हूँ पर
तनिक नहीं अभिमान।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







