"हिंदी साहित्य के पितामह"
'अंधेर नगरी' बनकर तुम समाज की व्यथा को समझो, 'नीलदेवी' की तरह तुम प्रेम की गाथा को समझो, 'भारत दुर्दशा' की तरह तुम देश की दशा को समझो, 'प्रेम जोगिनी' की तरह तुम प्रेम की प्रीत को समझो।
'चंद्रावली' की तरह तुम प्रेम की कहानी को समझो,
'दुर्लभ बंधु' की तरह तुम प्रेम की गाथा को समझो,
'विद्यासुंदर' की तरह तुम प्रेम की प्रीत को समझो,
'सत्य हरिश्चंद्र' की तरह तुम सत्य की गाथा को समझो।
'प्रेम तरंग' की तरह तुम प्रेम की लाह को समझो,
'हिंदी भाषा' की तरह तुम भाषा की प्रीत को समझो, 'भारत भिक्षु' की तरह तुम देश की दशा को समझो, 'प्रेम प्रवाह' की तरह तुम प्रेम की गाथा को समझो।
'सरस्वती' की तरह तुम कविता की बानी को समझो, 'कविवचन सुधा' की तरह तुम कविता की प्रीत को समझो,
'भारतेंदु हरिश्चंद्र' की रचनाओं में तुम जीवन का सार पाओ,
'पूर्णप्रकाश' की तरह तुम जीवन का प्रकाश समझो।
'चंद्रप्रभा' की तरह तुम प्रेम की कहानी समझो, 'वैष्णवता और भारतवर्ष' की तरह तुम धर्म की प्रीत समझो,
'प्रेममाधुरी' की तरह तुम प्रेम की गाथा समझो,
'सती प्रताप' की तरह तुम सतीत्व की प्रीत समझो।
'प्रेम प्रलाप' की तरह तुम प्रेम की व्यथा समझो,
'भारत सौभाग्य' की तरह तुम देश की प्रीत समझो, 'कवि वचन सुधा' की तरह तुम कविता की बानी समझो,
'हरिश्चंद्र पत्रिका' की तरह तुम पत्रकारिता की प्रीत समझो।
'लक्ष्मी' की तरह तुम धन की प्रीत को समझो,
'अजगर' की तरह तुम जीवन की कठिनाइयों को समझो,
'बाल बोधिनी' की तरह तुम शिक्षा की प्रीत को समझो,
'हरिश्चंद्र चंद्रिका' की तरह तुम जीवन की चमक को समझो।
'हरिश्चंद्र मैगज़ीन' की तरह तुम साहित्य की प्रीत को समझो,
'सत्य हरिश्चंद्र' की तरह तुम सत्य की गाथा को समझो,
'बकरी विलाप' की तरह तुम जीवन की कठिनाइयों को समझो, '
'भक्ति सर्वस्व' की तरह तुम भक्ति की प्रीत को समझो।
'गीत गोविंद' की तरह तुम कविता की बानी को समझो,
'भारतेंदु हरिश्चंद्र' की रचनाओं में तुम जीवन का सार पाओ।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा ,अरेराज ,पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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