ज्ञान इतना ही देना प्रभु 🌺
कि अपने पर अहम् न हो जाए
और भक्ति फीकी न पड़ जाए🌼
संसार का मोह इतना ही देना
कि आपका मोह फीका न पड़ जाए❤️
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कान्हा से प्रीति ऐसी हुई ❤️
कि एकान्त में भी मीठी सी चहल-पहल सुनाई देने लगी 🌼
और संसार के शोर-गुल में भी एकान्त अनुभव होने लगा 🌺
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मन का थोड़ा चंचल होना भी अच्छा है 😊
अगर मन चंचल न होता तो कान्हा की पर मोहित कैसे होता❤️
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वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







