💐🎂कलम का बाहुबली: मनोज मुंतशिर शुक्ला🎂💐
आज एक ऐसी शख्सियत का जन्मदिन है जिनकी कविताएं और गीत पढ़के, सुनके लाखों दिल झूम उठते हैं। शायद ही कोई शख़्स होगा जो उन्हें पढ़के और सुनके उनका कायल ना हुआ होगा... हर उन्हें सुनने वाला, पढ़ने वाला, उनका और उनकी कविताओं, गीतों, ग़ज़लों का कायल हो जाता है।
हम बात कर रहे हैं "कलम के बाहुबली मनोज मुंतशिर शुक्ला " की, जिनका जन्म "उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज में 27 फरवरी 1976 को एक ब्राह्मण किसान परिवार" में हुआ था।
मनोज मुंतशिर शुक्ला एक बहुत ही अच्छे कवि, शायर, गीतकार, टेलीविजन स्क्रिप्ट और पटकथा लेखक हैं।
पुस्तकें:-
✍️"मेरी फितरत है मस्ताना"
✍️"जो मेरी नस-नस में है"(माॅं,मातृभूमि और मोहब्बत)
मनोज मुंतशिर जी, मुंतशिर होने से पहले मनोज शुक्ला थे। उर्दू पोएट्री जिसमें सभी शायरों, कवियों का एक पेन नेम होता ही है, मनोज जी भी एक पेन नेम की तलाश में थे।
एक दिन वो चाय की एक टपरी पर जाते हैं वहां रेडियो में उन्हें एक शेर सुनाई देता है "मुंतशिर हम है तो रुखसारों पे शबनम क्यों हैं आईने टूटते रहते हैं तुम्हें ग़म क्यों हैं"।
यहां ये "मुंतशिर" शब्द इन्हें इतना भा गया कि इन्होंने अपना पेन नेम "मुंतशिर" रख लिया। बस यहीं से मनोज शुक्ला, मनोज मुंतशिर हो गए।
"मनोज मुंतशिर शुक्ला" जी ने अपनी पहली मुकम्मल नज़्म जब उन्हें पहली बार प्यार हुआ था 1994 जब वो 12th क्लास में थे और इस जबरदस्त वाले प्यार में जब ब्रेकअप हुआ, तब लिखी थी और ब्रेकअप की वजह यह थी कि ये शायरी करते थे फिल्मों में गीत लिखने को ही अपना कैरियर बनाना चाहते थे।
उस वक्त भी और कहीं न कहीं आज भी लोग यही मानते हैं कि लिखना बस टाईम पास, वक्त और पैसों की बर्बादी है। लेखक बस गरीब ही होता है, लिखने से कोई कुछ हासिल नहीं कर सकता है, तो यही था जिससे इनका ब्रेकअप हो गया। जिनसे ये प्यार करते थे वो इनसे उनकी चिट्ठियां ओर फोटोग्राफ्स वापस मांगती हैं कि ये मुझे वापस लौटा दो, हमारी कहानी यहीं तक थी बस अब सब ख़त्म करते हैं...तब "मनोज मुंतशिर शुक्ला" जी अपनी पहली नज़्म लिखते हैं......
आँखों की चमक जीने की लहक सांसो की रवानी वापस दे,
मै तेरे ख़त लौटा दूंगा तु मेरी जवानी वापस दे।
जब फुलों वाली रुत आई और जश्न मनाया दुनिया ने,
जब टूट के बरसी मस्त घटा और झूम के नाचे दीवाने।
फेर के आँखे हर शय से मैं तेरा दर्द संजोता रहा,
चुप-चाप अँधेरे कमरे में बिस्तर पे पड़ा मैं रोता रहा।
तेरी याद में जिनको ख़ाक़ किया वो शामें सुहानी वापस दे,
मैं तेरे ख़त लौटा दूंगा तु मेरी जवानी वापस दे।
वो दिन भी कैसे दिन थे जब पलकों पे ख़्वाब पिघलते थे,
जब शाम ढले सूरज डूबे दिल के अंगारे जलते थे।
वो धूप छाँव सब खाक हुई यादों के चेहरे पीले हैं,
कल ख़्वाबों की फसले थी जहाँ अब रेत के बंजर टीले हैं।
आँखों के दरिया सुख गये ला इनका पानी वापस दे
मैं तेरे ख़त लौटा दूंगा तु मेरी जवानी वापस दे,
दिल धड़के पर आवाज़ न हो ये शर्त मुझे मंज़ूर नहीं,
तेरे ग़म से बगावत कर न संकू मैं इतना भी मजबूर नहीं।
जब चाहा तब प्यार किया जब चाहा तब रूठ गये,
बस एक अंगूठी लौटा दी और सारे रिश्ते टूट गये।
ला मुझको मेरे अरमानों की हर एक निशानी वापस दे,
मैं तेरे ख़त लौटा दूंगा तु मेरी जवानी वापस दे।
यहां इनका ब्रेकअप हो जाता है, उसके 2-3 साल बाद इनकी शादी तय होती है और जिससे शादी तय होती है उनसे इन्हें प्यार हो जाता है और यही शादी टूट भी जाती है इसी वजह से कि इन्हें सॉन्ग राइटिंग को अपना कैरियर बनाना था। एक बार फिर दिल टूट जाता है।
फिर नीलम जी जो कि इनकी पत्नी है इनकी ज़िंदगी में आती हैं और एक बहुत अच्छी दोस्त बनकर हर कदम पर इनका साथ निभाती हैं।
"मनोज मुंतशिर शुक्ला "1999 में गीतकार बनने का सपना लेकर मुंबई आते हैं जहां इन्हें काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है, इनके कई दिन और रातें फुटपाथों पर और भूखे रहते हुए बीतते है।
बाद में "कौन बनेगा करोड़पति" से इनके लेखन की शुरुआत होती है और फिर फिल्म राइटिंग और सॉन्ग राइटिंग भी शुरू होते हैं जो कि इनका ख़्वाब था।
इन्होंने कई फिल्मों के लिए कई हिंदी गीत लिखे। जिनमें " तेरी गलियां", "कौन तुझे", "तेरे संग यारा", "दिल मेरी ना सुना", "फिर भी तुमको चाहूंगा" और "तेरी मिट्टी" शामिल हैं।
39 फ्लॉप गाने के बाद इनका 40 वां गाना "तेरी गलियां"जो कि 2014 में आया, हिट होता है।
2005 में इनकी पहली फिल्म "u bomsi n me"आती है जिसके सॉन्ग इन्होंने लिखे,लेकिन इन्हें अपनी फिल्म देखने के लिए टिकिट नहीं मिलती हैं क्योंकि इस फिल्म को देखने वाले बस तीन लोग थे।
2016 में इनकी एक और फिल्म रिलीज होती है और इन्हें फिर टिकट नहीं मिलता है क्योंकि तब देखने वालों की भीड़ बहुत होती है इस फिल्म का नाम था "बाहुबली 2" ......
2019 में "तेरी मिट्टी" गीत लिखके मनोज मुंतशिर शुक्ला जी हर दिल में बस गए।
ये थी "मनोज मुंतशिर शुक्ला" जी की कठोर संघर्ष से सफलता तक की कहानी।
🎂💐 मनोज मुंतशिर शुक्ला जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🎂
Article by
Admin - Reena Kumari Prajapat 


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
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