हम लड़के है जनाब
हंसते हुए चेहरे के पीछा रोते हुए मुस्कान रखते है
हम सिर्फ ठीक होने का दिखावा करते है
पर अंदर से कितने टूटे है ये सिर्फ हम जानते है
लोग तो कहा देते है कि खुशनसीब हो
पर अंदर पल रही बदनसीबी कौन जाने
मां बाप समाज सबको हम आवारा लगते है
पर ये अंदर से कितना टूटे है ये सिर्फ हम जानते है
लोगों को सामने सम्भल कर रहते है
पर अंदर से कितने बिखरे है वो सिर्फ हम जानते है
एक लड़की याद में ता उम्र गुजर देते है
फिर भी धोखेबाज़ का नाम हम सह जाए करते है
मां बाप तो सिर्फ तने देते है
पर उस तने का दर्द तो सिर्फ हम लड़के ही समझते है
नाकामयाबी का दाग लेके
अंदर ही अंदर मरते रहते है
🥹😔
लेखक -शिवम् जी सहाय


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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