Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

"उड़ान सपनों की"

"उड़ान सपनों की"

छोड़ के सारे भटकाव तुम,
अपनी शक्ति को पहचानो।
लक्ष्य तुम्हारा दूर नहीं है,
इस सत्य को तुम अब मानो।

किशोरावस्था की ये राहें,
ले जातीं छल-छांव की ओर।
क्षणभर का आकर्षण केवल,
तोड़ न दे सपनों की डोर।

आँखों में जो सपने पाले,
उनको तुम आधार बनाओ।
दूसरों पर दिल हारने से बेहतर,
खुद का तुम संसार बनाओ।

तुम शक्ति हो, तुम साहस हो,
कल का तुम ही उजाला हो।
अपनी मेहनत के बल पर तुम,
किस्मत ढालने वाली हो।

ज़माने की बातों में न आओ,
सीधे अपनी राह चलो।
पंख पसारो नीले नभ में,
अपने लक्ष्य की ओर बढ़ो।

यह उम्र ढलती छाँव जैसी,
क्षणिक सा बस बहकाव है।
ज़माने की इस चमक-धमक में,
छल का ही प्रभाव है।क्यों गँवाती हो अनमोल पल,
बेवजह के अनुराग में?
तेरी पहचान तो छुपी हुई है,
तेरे मेहनत के पराग में।

आकर्षण की इस आंधी में,
अपने कदम डगमगाने न दो।
जो समय मिला है गढ़ने का,
उसे व्यर्थ ही बह जाने न दो।

दिल के चंचल बहकावों को,
तुम समझदारी से शांत करो।
दूसरों की राहों पर चलने से बेहतर,
तुम खुद का नया विधान करो।

किताबों के पन्नों में जो ज्ञान है,
वही तेरी असली ताकत है।
आसमान को छू लेने की,
तुझमें छिपी वो सलाहियत है।
तू किसी की परछाईं नहीं,
तू खुद अपना वजूद है।
तेरे सपनों की उड़ानों में,
असीम हौसला मौजूद है।

न झुकना कभी किसी मोड़ पर,
न ही अपनी उड़ान भूलना।
दूसरों को रिझाने की चाहत में,
तुम अपनी ही पहचान न भूलना।

कलम उठाओ, इतिहास लिखो,
तक़दीर को अपनी मोड़ दो।
जो बाँधती हैं तरक्की को,
उन ज़ंजीरों को तुम तोड़ दो।

जिस दिन तुम काबिल बनोगी,
यह सारा जहाँ झुक जाएगा।
तेरी हिम्मत और लगन देखकर,
हर भटकाव खुद ही रुक जाएगा।

तू शक्ति है, तू सवेरा है,
तू खुद अपनी मशाल बन।
दूसरों के पीछे चलने की बजाय,
ज़माने के लिए मिसाल बन।

रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (1)

+

ललित दाधीच said

बहुत सुंदर रचना लाजवाब बेमिसाल अजब गजब ❤️❤️❤️❤️❤️❤️, अच्छा संदेश एक प्रेरणादायक रचना

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