कुछ कहना चाहता हूँ,
मगर फिर चुप हो जाता हूँ।
कहना कितना मुश्किल है,
मैं अच्छी तरह जानता हूँ।
कहने से ही तो नाराज़ हो जाते हैं
वो सब, जो समझते हैं
कि मैं आम आदमी हूँ।
कहाँ कहना जानता हूँ?
कहने का अधिकार है
किसी खास आदमी का,
जो कहने का हुनर जानता है।
मैं तो सिर्फ़ सुनाने को बना हूँ,
मेरा काम सुनना है।
कुछ कहना चाहता हूँ,
मगर फिर चुप हो जाता हूँ।
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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