Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

"चरित्र ही सच्चा आभूषण है"

"चरित्र ही सच्चा आभूषण है"

चमक-दमक की इस दुनिया में,
क्यों अपनी नींव हिलाते हो?
क्षणिक सुखों के मोह में पड़कर,
क्यों चरित्र गँवाते हो?

नारी हो या नर हो कोई,
मर्यादा सबका गहना है।
सत्य, धर्म और सदाचार से,
जीवन सुंदर करना है।

आज हवाओं में बहकर क्यों,
संस्कारों को भूल रहे हो?
स्वार्थ की इस अंधी दौड़ में,
अपनों से क्यों दूर हो रहे हो?

रिश्तों की पावन मर्यादा को,
क्षणभर में मत तोड़ो तुम।
चंद स्वार्थ की खातिर अपनी,
गरिमा का मत मोल करो तुम।

जिन माता-पिता ने तुम पर,
अपना सर्वस्व वार दिया।
उनके जीवन में तुमने क्यों,
दुःख का अँधियारा भर दिया?

जो जन्मदाताओं को छलते,
वे क्या प्रीत निभाएँगे?
विश्वासघात की राह पकड़कर,
किस-किस को ठेस पहुँचाएँगे?

जिनके श्रम और त्याग ने तुमको,
जीवन में समर्थ बनाया।
उनकी ममता, उनके सपनों को,
क्यों पलभर में बिसराया?

जो अपनों की ममता का ऋण,
सम्मान से न चुका पाते हैं।
वे जीवन के सच्चे सुख से,
अपने हाथ गँवाते हैं।

क्षणिक वासना के वश होकर,
जो अपना ईमान गँवाते हैं।
वे अपने ही हाथों जीवन में,
दुःख के बीज उगाते हैं।

दूषित विचारों से बचकर रहना,
ये समाज को छलते हैं।
जो नैतिकता भूल जाते हैं,
वे अँधियारे में चलते हैं।

रूप-सौंदर्य सब ढल जाएगा,
धन-दौलत भी मिट जाएगी।
पर चरित्र की निर्मल सुगंध,
युगों-युगों तक रह जाएगी।

वासना के चक्रव्यूह को तोड़ो,
संयम का संकल्प जगाओ।
जो भटक गए हैं पथ से अपने,
उनको सही राह दिखाओ।

अँधकार चाहे कितना गहरा,
सदाचार का दीप जलाओ।
अपनी भूलों को सुधारकर,
नवयुग का इतिहास बनाओ।

नज़रों में सम्मान सदा हो,
मन में निर्मलता की धारा।
वाणी में मधुरता बसी हो,
कर्म बने जीवन का तारा।

तन की सुंदरता क्षणभंगुर है,
मन की सुंदरता अमर रहे।
चरित्र की उज्ज्वल ज्योति जहाँ हो,
सत्य वहीं पर अटल रहे।

युवा पीढ़ी, देश की आशा,
तुम भविष्य के हो दर्पण।
चरित्रवान जीवन से ही,
पावन होगा यह जन-जीवन।

धूमिल मत होने दो इसको,
चरित्र अनमोल धरोहर है।
सत्य, निष्ठा और धर्म की राहें,
जीवन का सच्चा आभूषण हैं।

रिश्तों की पावन डोर को,
छल-कपट से तार-तार न करो।
सच्ची निष्ठा, प्रेम और संयम से,
जीवन का शृंगार करो।

उठो, चेतना की अलख जगाओ,
अंतरमन को निर्मल करो।
केवल तन की सुंदरता मत देखो,
चरित्र से जीवन उज्ज्वल करो।

अपनी सोच पर संयम रखो,
दृष्टि में सम्मान का भाव।
जहाँ चरित्र का दीप जलेगा,
मिट जाएगा मन का अभाव।

अपने कर्मों से जग में,
एक नई मिसाल बनाओ।
सत्य और सदाचार के पथ पर,
विश्वास के दीप जलाओ।

चरित्र ही मानव का गौरव,
चरित्र ही सच्चा गहना है।
धन-दौलत सब छूट जाएगा,
चरित्र सदा संग रहना है।

रचनाकार - पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)




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