तेरे साथ में गुजारा हर लम्हा याद आए।
गलती क्या हुई आनलाईन नज़र न आए।।
तेरे रंग के जादू छितराते ही नही क्या करे।
बेकाबू हो जाने का कोई तरीका न आए।।
हकीकत कुछ और रही बदलते परिवेश में।
मगर तस्वीर में तूँ आज वैसी नज़र न आए।।
तूँ जो बनाती है पसंदीदा तो नही 'उपदेश'।
समझने लगी कुछ कुछ वैसा समझ न आए।।
कोई जगह नही छोड़ी जहाँ पर खुशबू नही।
हवा चलती नही अब उसको चलन न आए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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