मन में गर प्यास का अहसास घना होता है
हर कदम सहरा में समंदर का गुमां होता है
खुद टपक पड़ता है आकर हमारी झोली में
फल के पकने का यह अंदाजे बयां होता है
जलते सूरज का चेहरा छिप गया जंगल में
चाँद निकलने का बस पहला निशां होता है
सिर्फ दीदार की तमन्ना और इतना हंगामा
किससे मिलने हरेक दीवाना फ़िदा होता है
दास बिल्कुल पास हैं अब दिन कयामत के
यार जिगरी मेरा दुश्मन बनके जुदा होता है. .


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







