आँख में आँसू छिपा के ऐसे कौन मुस्कराता है,
एक तरफा रिश्ता, उम्र भर यूँ कौन निभाता है,
समझदारों की है ये दुनिया, मैं ठहरा नासमझ,
हाँ तुम सच कहती हो, मुझे कुछ नहीं आता है।
साथ रहने का वादा कर, कौन छोड़ के जाता है,
आँखों में जगा के हसीन सपने, कौन रुलाता है,
तुमने जब, जो, जैसा कहा मैंने उसे सच माना,
हाँ तुम सच कहती हो, मुझे कुछ नहीं आता है।
अपनी हर बात को जो तुम्हें सच-सच बताता है,
इतना यकीन तुम पर कि कुछ नहीं छिपाता है,
हर वक्त साथ रहने वाले की कदर करता कौन,
हाँ, तुम सच कहती हो, मुझे कुछ नहीं आता है।
साथ जीए हुए उन लम्हों को कौन भूल पाता है,
वो जब याद आता है, बहुत कुछ याद आता है,
लोग कहते हैं “सुभाष” अब थोड़ा समझदार बन,
हाँ तुम सच कहती हो, मुझे कुछ नहीं आता है।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







