मुझे आधुनिकता से कुछ लेना देना नहीं है
मेरा घर मिट्टी का है
दरवाजे पर नीम है, आम है, अमरुद है
एक गाय और दू गो बछिया है
बैठने को खाट है
बिछाने को खाट है
कुर्सियां सपने में दिखती हैं मेरे
सपने में मिलने वाली ए. सी. की हवा....
पेड़ों के नीचे मिल जाती है हमें
पीने को पानी है... दूध है
खाने को दही है
कोल्डड्रिंक चौराहे पर मिलती है...
मगर......पीने में मट्ठा सही है
आधुनिकता के कीड़े मारती है मेरी माली हालत...
वे काट ही नहीं पाते लाख कोशिश के बाद भी
नया बिछौना.. अब भी नया है
रिश्तेदार यदा - कदा ही आते हैं मेरे घर
कुछेक रिश्तेदार ए. सी. वाले हैं
और बड़ी हवेलियों के मालिक भी
उन्हें नहीं भाता....मेरा घर,
मेरी हालत और मेरे कुछ - एक पेड़
फिर क्या??? नहीं आतें हैं मेरे घर ....
मैं खुश हूँ अपनी गृहस्ती में
अपने संसाधनों पर फक्र है मुझे
लोग चारपहिया से साईकिल पर आ रहे
मैं रोज चलाता हूँ साईकिल
कट जाएगा सफ़र अपना
बस होता रहे ऐसे ही गुजर - बसर अपना
-सिद्धार्थ गोरखपुरी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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