अब तो जिंदगी ने मेरा दरवाजा खटखटाना छोड़ दिया
प्यार ने साथ निभाना छोड़ दिया
खड़ा हू जिंदगी के उस मोड़ पर
जहाँ अपनो ने साथ निभाना छोड़ दिया।।
लोग बदल रहे है समय आने पर
हर कोई मुकर रहा है किसी न किसी मोड़ पर
अब भगवान से क्या शिकायत करूं
मेरी तो महबूबा मुकर गई समय आने पर।।
अभी तो उम्र इक्कीस को छुई है
तजुर्बा आसमान छू रहा है
मेरा भगवान जानता है कौन किसे चुन रहा है
अब तो लोगों की नियत बदल रही है समय आने पर।।
हा मैं भी मुकर गया था समय आने पर
जब उसने बुलाया था अपनो के घर आने पर
वो तो लोग थे खैर, मुकर गये मौके आने पर
तब से मैं अकेला जी रहा हु खुद को आजमाने पर।।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







