के हमने जीवन जिया नहीं बस काटा है
एक निवाला रोटी का हमने बांटा है
ना पूंछो हमसे जिंदगी में कयामत बहुत है
जिंदगी से शिकवे ही नहीं शिकायत बहुत है
किस को बताएं यहां अपना रोग कर्ज बहुत है
इस मर्ज़ में दवा कोई नहीं बस दर्द बहुत है
ना चाहते भी लेनी पड़ती है सांसे मजबूरी बहुत है
घर के मुखिया जो ठहरे जीना पड़ेगा जरूरी बहुत है
डर लगता है साहिब उड़ते तीरों से यहां शिकारी बहुत है
लिया दिया कुछ नहीं लोग कहते है यार भिखारी बहुत है
दीवाने कर तो ले ब्याह भी मगर दीवारें बहुत है
सामूहिक मंडप देखा तो दीवाने कुंवारे बहुत है
नीटू मावी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







