इतना भी सस्ता नहीं हुआ हूँ अभी बाज़ार में,
कि वो मुझे रोज़ देखे किसी आम अख़बार में।
मेरी खामोशी को मेरी हार समझने की भूल मत करना,
मैं वो सिक्का हूँ जो आज भी कीमती है हर दरबार में।
लोग ढूंढते रह जाएंगे मेरी शख्सियत के मायने यहाँ,
हमने अपनी साख गँवाई नहीं है हुस्न के व्यापार में।
जिसे कद्र नहीं थी मेरी वो तरसेगा एक झलक को मेरी,
ऐसी चमक लाऊँगा अब अपनी इस नई रफ़्तार में।
-#seth Kundan


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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