Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

ये कैसी उम्मीदें खा गई हमारी नस्ले उदास हैं

ये कैसी उम्मीदें खा गई हमारी नस्ले उदास हैं
खाद-पानी देकर भी हमारी फसले हताश हैं

उम्र ऐसी हैं ख़्वाब का सागर कम लगने लगे
असल में दो निवाले के रोजगार की तलाश है

पढ़-पढ़ उम्र जाया की और कुछ भी न हुआ
बड़ी-बड़ी डिग्रियों में तों अब पैसो का हास है

समाज परिवार पूछता है कुछ मक़सद हैं तेरा
फिलहाल जिंदगी क़ो ज़िंदा रखने का प्रयास है

उम्र गुजरने क़ो हैं ये दिल कैद परिंदा बना रहा
क़फ़स की तिलियों में अब आँसू की प्यास हैं

हक़ीक़त जीने नहीं देती ख़्वाब तंज कसते हैं
और नादानो में मुहब्बत बर्बादी का कयास हैं

ज़िंदा लाश हुए अपनों की बेड़िया निगल गई
आज़ादी तों अब मेरी नज़र में बस उपहास हैं

ये दुःख ये पीड़ा ये ज़र्फ़ कृष्णा ख़त्म नहीं होंगे
ये पैरहन-ए-रूह भी जैसे भीगा हुआ कपास है...
-कृष्णा शर्मा




समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (8)

+

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह अतिसुंदर कविता 👌🙏🙏 संघर्ष के बाद अप्रत्याशित असफलता, वक्त की जंजीरों में जकड़ी हुई आशा निराशा से भरी वृतांत का प्रवाहमयी प्रस्तुति 👌👌🙏🙏

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏
सादर प्रणाम आपको 🙏

Lekhram Yadav said

बेरोजगारी और उसके दुष्प्रभावों पर कटाक्ष करती एक खूबसूरत रचना आपको सादर नमस्कार।

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏
सादर प्रणाम 🙏

वन्दना सूद said


समाज परिवार पूछता है कुछ मक़सद हैं तेरा
फिलहाल जिंदगी क़ो ज़िंदा रखने का प्रयास है

आपकी रचना पढ़कर कहीं पढ़ी हुई एक बात याद आ गई कि जिनके रिश्तेदार बहुत होते हैं उन्हें शत्रुओं की क्या ज़रूरत 😊

कृष्णा शर्मा replied

जी,
बिल्कुल सही कहा आपने 🙏
बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏☺️
सादर प्रणाम 🙏☺️

सरिता पाठक said

Bhut ही खूबसूरत रचना ह्रदयस्पर्शी कृष्णा जी ko सादर प्रणाम 👍🙏

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏
सादर प्रणाम सरिता जी ☺️🙏

ललित दाधीच said

बहुत खूबसूरत लिखा, कवयित्री महोदया आपको email par message kiya tha , samay ho toh reply jarur karna

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया ☺️🙏

उपदेश कुमार शाक्यावार said

आपकी रचना में गहराई भरपूर है अति उत्तम 🙏🙏

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया ☺️🙏
सादर प्रणाम ☺️🙏

रीना कुमारी प्रजापत said

Ati sundar rachna 🙏 sadar pranam aapko

कृष्णा शर्मा replied

सादर प्रणाम 🙏☺️
बहुत-बहुत शुक्रिया ☺️🙏

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

ये दु:आ ये पीड़ा ये ज़र्फ़ कृष्णा ख़त्म नहीं होंगे
ये पैरहन-ए-रूह भी जैसे भीगा हुआ कपास है...
वाह! बेहद उम्दा! बेहतरीन लिखा है आपने, कृष्णा जी! जितनी तारीफ़ करूॅं वो कम है! आलातरीन कलाम! 👌👏❤️🙏😊

कृष्णा शर्मा replied

सादर प्रणाम 🙏☺️
बहुत-बहुत शुक्रिया ☺️🙏

कविताएं - शायरी - ग़ज़ल श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन