अनजाने में ही दिल लगा बैठा
ये बात कुछ अलग है
शामत खुद ही सर पर ला बैठा
ये बात कुछ अलग है
फूल खिली सूरज की रौशनी में
भौंरा झूमा, गीत गुनगुना बैठा
ये बात कुछ अलग है
जमाना जैसा है ठीक ही होगा
एक दीवाना दस्तूर निभा बैठा
ये बात कुछ अलग है
ये दिल चालाकी नहीं जानता
स्वयं, स्वयं से ही दूर जा बैठा
ये बात कुछ अलग है
गुनाह आंखों की,सजा दिल को
समझने का मौका ही गवां बैठा
ये बात कुछ अलग है।।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







