✨ वो दोस्त ✨
पुराने ज़ख़्मों पर जो मरहम बन गया,
वो दोस्त नहीं, मेरी दुआ बन गया।
डरते थे कदम जिस राह से कभी,
वो राह आज हौसलों की वजह बन गया।
जो दर्द मैं लफ़्ज़ों में कह न सकी,
वो मेरी आँखों से पढ़ गया।
भीड़ भरी दुनिया में तन्हा थी मैं,
वो आकर मेरा सुकून बन गया।
नई-नई चीज़ों से रूबरू कराता है जो,
ज़िंदगी जीने का तरीका सिखाता है जो।
खुशियाँ देने आया है जो मेरी ज़िंदगी में,
वो दोस्त नहीं—मेरा अपना बन गया।
— Gitanjali Gavel ✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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