चाहत की परछाइयाँ मन-दर्पण को छलने आई।
या दिल की धड़कन चुपके से कुछ कहने आई।।
कोई अपना अपने संग न रहने की कह जाएगा।
सपनों के संसार में अपनी भूमिका बदलने आई।।
वर्तमान की स्याह छटा बीते क्षण चित्रित करती।
या निष्कलुष हृदय की मूक वेदना सहलाने आई।।
भींगी पलकों की कोरो पर मुस्काने फिर आएगी।
या विरही मन को 'उपदेश' पर हीन बनाने आई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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