हाथ मिलाने के बहाने उँगलियाँ मसक गया।
बिना बाते बनाए ही मन अन्दर चहक गया।।
हिलोरें इस कदर बढ़ी कि लिपटने का मन।
माँ दही गुड़ उसे खिलाई प्यार से गटक गया।।
सौभाग्यवश चरणो की धूल मुझको मिल गई।
हाथ सिर पर उसका पल भर में सरक गया।।
मेरा दायरा सीमित साथ में निकल न सकी।
उसका दायरा आसमान सूर्य सा भटक गया।।
आँखों से जब विरह सहन ना हुआ 'उपदेश'।
तब आँखों को पोछता हुआ यार खिसक गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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