उनकी यादों का महल जो बनाया था हमने कभी,
अब वो किसी और का होने जा रहा है।
जहां खड़े होकर हम उन्हें अपने पास
महसूस करते थे,
आज वो मुक़ाम किसी ग़ैर का होने जा रहा है।
उनकी अमानत को हमने बनाया था,
उनकी अमानत को हमने सजाया था।
वो आज किसी और की अमानत होने जा रही है,
जिस अमानत को हमने बड़े नाजों से पाला था।
जिस महल में बेवक्त, बेझिझक चले जाया करते थे,
अब उसमें फिर कभी जा नहीं पाएंगे।
माना कि चले भी गए इजाज़त मिलने पर,
लेकिन पहले सा सुकून पा नहीं पाएंगे।
जो कभी प्यार मोहब्बत की इमारत हुआ करता था,
वो अब वीराना बन जायेगा।
जो कभी सभी का हुआ करता था,
वो अब किसी अजनबी का आशियाना बन जायेगा।
🖋️ रीना कुमारी प्रजापत 🖋️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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