"उनकी मृत्यु महान है (जयहिंद के साथ में)
""कफ़न ओढ़े मिट्टी की,
जहां से लौट गया,
हाथों में तिरंगा ऊँचा,
जमाना चूम गया,
अपने प्यारे तिरंगे की शान है,
उनकी मृत्यु महान है,
वीरांगना वीरों का ही दिल आसमान है,
वो सपूत नहीं सम्मान है,
उनकी मृत्यु महान है,
अपने जीवन को धूल समझा वतन के वास्ते,
जहाँ जाते गर्व करते ये भूमि महान है,
उनके पैरों ने बरकत कर दी,
इतना ईमान है,
उनकी मृत्यु महान है,
अपने पैरों पर खड़े हुए तो,
सीधे तिरंगे में समा गए,
उनकी गौरवगाथा सुनके,
अब लगता मेरे पैरों में भी जान है,
उनकी मृत्यु महान,
जिस मिट्टी खुश्बू सूंघी वो उनका रक्त लिबास है,
शूलों ने ही उनको देखा,
वो खड़े थे वतन के वास्ते,
शूल वहीं पर रो दिए,
कहते रहे, ये वीर वही ज़िंदादिल इंसान हैं,
शूलों ने भी अपना दिल ज़िंदा किया,
और फूलों से भी कोमल होते गए,
उनकी मृत्यु महान है,
वो मिट्टी की पहचान है,
उनकी सुंदर सी जान है,
भारत उनके भीतर बसता,
सबको जगा देते जय हिंद के नाम से,
उनकी मृत्यु महान है,
ये स्वतंत्रता तभी तो जान है,
उनकी मृत्यु महान है,
उनकी मृत्यु महान है।।""
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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