तुम्हें पाकर अब,खोना नहीं चाहता
सूखी सूखी आंसू,रोना नहीं चाहता!
गमगीन होकर भी,खुले आसमान में
उड़ने वाला पखेरू,होना नहीं चाहता!
मुद्दतों बाद फिर, जिंदगी हल्की हुई
भारीपन दिल पर, ढोना नहीं चाहता!
चैनो अमन नींद, भरपूर जो मिली है
दरिया में ये पूंजी,डूबोना नहीं चाहता !
हो करम,हम पर करम,उसका करम,
कयामत तक दूर, तुमसे,होना नहीं चाहता!
तुम्हें पाकर अब,खोना नहीं चाहता!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







