माटी हिंदुस्तान की
माटी इसकी चंदन जैसी, माथे का सम्मान है,
कण-कण में इतिहास बसा, कण-कण में अरमान है।
गंगा, यमुना, सरयू कहतीं देखो मेरी शान,
धरती के हर कोने से प्यारा मेरा हिंदुस्तान।
कहीं हिमालय प्रहरी बनकर, सीमा पर तन जाता है,
कहीं थार की तपती रेत में सूरज मुस्काता है।
पूरब की बारिश, दक्षिण का सागर, पश्चिम की उड़ती धूल,
भारत के हर रूप में दिखता—माँ का आँचल अनमोल।
भाषाएँ बदलीं, वेश बदले, बदले रीति-रिवाज,
फिर भी दिल में एक तिरंगा, एक वतन का राज।
मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारा हो या गिरजे की पहचान,
रास्ते भले हों अलग-अलग, मंज़िल है हिंदुस्तान।
राम की मर्यादा यहीं, कृष्ण की बाँसुरी यहीं,
ऋषियों की तप-भूमि यहीं, संतों की वाणी यहीं।
दुनिया को जिसने ज्ञान दिया, वह धरती है महान,
जिसे जगत कहता भारत, वो मेरी माँ समान।
मंगल की हुंकार सुनो, भगत सिंह की आग सुनो,
आज़ाद की आज़ादी सुनो, बिस्मिल का अनुराग सुनो।
झाँसी की रानी पूछ रही—क्या तुममें है वो बलिदान?
जिनके रक्त से लिखी आज़ादी, उनका ऋणी हिंदुस्तान।
आज 'मयंक की कलम' नहीं, 'मयंक का दिल' बोल रहा,
माँ की मिट्टी का कर्ज़ चुकाने का संकल्प खोल रहा।
जब तक साँस चलेगी मेरी, तब तक एक ही गान,
भारत मेरी पहचान नहीं… भारत ही मेरी जान!
और अगर कोई पूछे मुझसे—सबसे ऊँचा कौन?
मैं सीना तानकर कह दूँ—मेरा भारत महान!
झंडा जब तक आसमान में, तब तक मेरा अभिमान,
जय हिंद! जय भारत! जय-जय हिंदुस्तान!
रचनाकार :- डॉ. मयंकेश कुमार दुबे(शिक्षक एवं लेखक)
एम.ए. इतिहास(गोल्ड मेडलिस्ट )
औलेंडा,आगरा, उत्तर प्रदेश
मो. :-8630291252, 8979776231


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







