जमीं बार बार इशारा दे रहा है न मैं देख सकता न तुझे कुछ बता सकता खुद संभल कर चलना मेरे ज़मीन पर
ऐसा न हो कि लगे ठेस तो हमें भला बुरा कहना ये तेरे हित मे अच्छा नहीं होगा हम बे रूह हैं रूह वाले चलते हैं मुझ पर
रूह को बहुत रास्ते मालूम है उल्टा सीधा ये दिमाग से समझना होगा काबू में रखकर मनमाना ख्याल चलने से बचना होगा
कहीं ऐसा न हो दिल डूब जाए तेरा मेरी जमीं के समुंद्र में ख्वाहिश जब तैर कर निकलना बस में नहीं होगा
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी ।
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर। 10.3.26


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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