"दीवाना यूं होना"
दीवाना कहता कोई, कोई क्यों कहता है,,
अपने लिए सिर्फ है सिर्फ रहता है,
दीवाना रहता कोई, कोई क्यों रहता है,
सजदे में ऐसा क्या था,
जो सारा जग झुकता है,
मांग ऐसी थी क्या,
जो उसके बिना पूरी ना हो ,
सारा जग जैसे है,
जैसे जग भरता नहीं ,
लाया भी ऐसा क्या था,
जो दे भी ना पाया,
सूना जहां भी नहीं,
फिर खाली क्या होता है,
मेरा तो मैं भी नहीं,
तो तेरा मेरा क्या होगा,
मैं तो खुद को ना देखा,
फिर आईने में भी क्या होगा,
मेरा तो खालीपन भुला देता मुझे,
तुम्हारे आने से,
तुम ही रह जाओगे,
यहां सिर्फ एक ही रह गया,
जो खुद भी है खोया,
सांसे जैसे उसकी सांसों के बीच है छुपी,
आंखों में देखता है,
जब सारे जग को नींद मिली हो,
मेरे आंसू बहना,
उसका जग भुलाना है,
दीवाना कहता कोई,
कोई क्यों रहता है।।
- ललित दाधीच।।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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