भारत में नागरिक होने का मतलब,
एक लम्बे समय बाद हम किसी भी,
शासन तंत्र से आजाद हुए,
हमारे लिए आजादी का सबसे बड़ा आधार ही,
चुनाव है जिससे लगता है कि हम लोकतन्त्र है,
पर जब वही प्रक्रिया तानाशाह हो,
तो दुःख होता है,
कि एक नागरिक के तौर पर,
हमारे पास ये भी स्वतंत्र नहीं है,
फिर लगता है हमारी लोकतन्त्र व्यवस्था भीतर से,
तानाशाही और मनमर्जी की है,
जहाँ नागरिक होना ही भेदभाव हो गया,
अरे नहीं आपके वीआईपी की तरह हमारे पास,
गाड़ी बंगला या पैसों का कारोबार,
नहीं हमारे पास दिखावा करने को,
तो क्या हम वोट भी ना दे,
या स्वतंत्र विचार भी ना रखें,
रहेंगे हमारे विचार भी,
रहेगा ये देश भी,
रहेगा ये लोकतंत्र जन संदेश भी,
किसी भी पार्टी के गुलाम नहीं है,
भारत के नागरिक हैं,
और भारत के नागरिक रहेंगे,
इस देश की मिट्टी ने हमको पाला है,
तो इसको बिखरने ना देंगे,
कोई चाहे महामानव हो,
चाहे कितना ही वादों का सौदागर,
देश जरूरी है जनता जरूरी है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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